सम्मेद शिखरजी: आध्यात्मिक और बहुआयामी तत्वों का भण्डार

11/2/20241 min read

blue lake near snow covered mountain during daytime
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सम्पूर्ण धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व

शिखरजी या श्री शिखरजी भारत के झारखंड राज्य के गिरिडीह ज़िले में छोटा नागपुर पठार पर स्थित एक पहाड़ी है जो विश्व का सबसे महत्वपूर्ण जैन तीर्थ स्थल भी है। 'श्री सम्मेत् शिखर जी' के रूप में चर्चित इस पुण्य क्षेत्र में जैन धर्म के 24 में से 20 तीर्थंकरों (सर्वोच्च जैन गुरुओं) ने मोक्ष की प्राप्ति की। यहीं 23 वें तीर्थकर भगवान पार्श्वनाथ ने भी निर्वाण प्राप्त किया था। माना जाता है कि 24 में से 20 जैन तीर्थंकरों ने यहां पर मोक्ष प्राप्त किया था।जो चार हजार सिडीयो पर स्थित है[2] 1,350 मीटर (4,430 फ़ुट) ऊँचा यह पहाड़ झारखंड का सबसे ऊंचा स्थान भी है।

सम्मेद शिखरजी को जैन बौद्धिकता, आस्था के साथ-साथ आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र भी माना जाता है। इसीलिए यहां आने वाले श्रद्धालुओं को हमेशा यह अहसास होता है कि यह स्थान न केवल अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का भी एक बड़ा स्रोत है, जहां मानव जीवन का एक नया अध्याय खुलता है।

इस क्षेत्र में स्थित 36 पहाड़ियों पर विभिन्न तीर्थंकरों और जैन ऋषियों के मंदिर बने हुए हैं। ये मंदिर केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि वास्तुकला की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। यहां की शांति और ध्यान अवस्था का अनुभव करने के लिए हर वर्ष हजारों की संख्या में अनुयायी आते हैं। इसके साथ ही, यह स्थल जैन समुदाय के लिए एक सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है। इस प्रकार, सम्मेद शिखरजी ना केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह जैन धर्म के इतिहास में एक अद्वितीय स्थान रखता है।

आध्यात्मिक यात्रा और पूजा विधियाँ

सम्मेद शिखरजी, जो कि जैन धर्म में श्री पार्श्वनाथ जी की निर्वाण स्थली मानी जाती है, भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है। यहाँ पर श्रद्धालु अपने आध्यात्मिक विकास के लिए दूर-दूर से आते हैं। इस धार्मिक यात्रा का उद्देश्य आत्मा की शुद्धि और दिव्य अनुभव को प्राप्त करना होता है। भक्त सबसे पहले आत्मिक मनन करते हुए शिखर की ओर अग्रसर होते हैं, जहाँ उन्हें ध्यान और साधना के लिए मनोबल मिलता है।

यहाँ की पूजा विधियों में सबसे महत्वपूर्ण है 'ध्यान' का अभ्यास करना। श्रद्धालु आमतौर पर सीधे पार्श्वनाथ जी की प्रतिमा के सामने बैठकर अपनी आँखें बंद करके ध्यान करते हैं। इस पूजा के दौरान, भक्त मन में सकारात्मकता लाने और अपने कर्मों का प्रायश्चित करने की भावना को सर्वोपरि मानते हैं। इसके अतिरिक्त, यहाँ का 'अवश्यक पूजा' या 'चौदह पूजन' का कार्यक्रम भी विशेष रूप से प्रशंसा का पात्र है, जिसमें भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार विभिन्न अर्पण करते हैं।

विशेष पर्वों के दौरान, जैसे 'महावीर जयंती' और 'पुरातन जयंती', यहाँ पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। इन अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और सामूहिक पूजा तथा आयुष्मान मंत्र का उच्चारण करते हैं। इस दौरान विभिन्न उत्सवों का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें भक्ति गीत गाए जाते हैं और प्रसाद वितरण होता है। इस प्रकार, सम्मेद शिखरजी केवल एक पूजास्थल नहीं है, बल्कि यह श्रद्धा, भक्ति और साधना का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी है, जहाँ हर कोई अपनी आत्मा की शांति खोजता है।

सम्मेद शिखरजी में पर्यटन और यात्रा :

सम्मेद शिखरजी, जो कि श्री पार्श्वनाथ जी की निर्वाण स्थली है, एक अद्भुत धार्मिक स्थल है जो न केवल जैन समुदाय के लोगों के लिए, बल्कि सभी यात्रियों के लिए एक विशेष अनुभव प्रदान करता है। यदि आप अपनी यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो यहां कुछ महत्वपूर्ण टिप्स और जानकारी साझा की जा रही है।

यात्रा की योजना बनाते समय सबसे पहले, यह सुनिश्चित करें कि आप किस मौसम में यात्रा करना चाहते हैं। सबसे उपयुक्त समय अक्टूबर से मार्च के बीच है, जब का मौसम ठंडी और सुखद रहता है। यात्रा के लिए आप राजसी मेलों और उत्सवों की तिथियों का भी ध्यान रखें, क्योंकि यह अनुभव को और भी अधिक रोचक बना सकता है।

सम्मेद शिखरजी तक पहुँचने के लिए सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन गोमो है, जो लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित है। यहाँ से टैक्सी या बस के माध्यम से आसानी से पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा, यदि आप सड़क के माध्यम से यात्रा करना चाहते हैं, तो विभिन्न शहरों से बस सेवाएं उपलब्ध हैं। विमान द्वारा यात्रा करने के मामले में, राँची हवाई अड्डा सबसे नजदीक है।

रहने की व्यवस्थाओं की बात करें, तो सांदीपनी या शांति धाम, सोलहपंथी कोठी और बीसपंथी कोठी जैसी साधारण लेकिन साफ-सुथरे आवास विकल्प मिलते हैं। पर्यसंस्कृति के प्रति सहानुभूति जताते हुए, ये जगहें यात्रियों के लिए आरामदायक और सुविधाजनक होती हैं। स्थानीय भोजन के लिए, आप छोटे ढाबों या रेस्तरां का चयन कर सकते हैं, जो बेहद स्वादिष्ट और पारंपरिक जैन व्यंजन पेश करते हैं।

अंत में, सम्मेद शिखरजी की यात्रा को स्मरणीय बनाने के लिए, यहाँ की अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेना न भूलें। यह यात्रा न सिर्फ आध्यात्मिकता को महसूस करने का अवसर प्रदान करती है, बल्कि जीवाष्टक और शांति का अनुभव भी कराती है।